Ek Bankar Ki Romanchakari Kahani

आई. आई. टी. कानपुर और आई. आई. एम. अहमदाबाद से प्रशिक्षित अजय मोहन जैन ने एक बड़े और प्रतिष्टित बैंक में नौकरी की शुरुआत की, जहाँ काम करते हुए उन्हें अलग-अलग शहरों में जाने पर और जीवन के विविध पहलुओं को नज़दीक से जानने का मौका मिला| इस अनुभव ने उन्हें इतना प्रभावित किया की वह यह कहानी लिखने पर मजबूर हो गये| वह पत्र-पत्रिकाओं और अख़बारों में भी नियमित रूप से लिखते रहें हैं, लेकिन उपन्यास के रूप में ‘एक BANKER की रोमांचकारी कहानी’ उनकी हिन्दी में रचित पहली पुस्तक है |

उनकी पुस्तक के बारें में अधिक जानकारी के लिए info@ajaymohanjain.com पर लिखें|

शहरी मध्वर्गीय जीवन के द्वंद्व का सजीव चित्रण करता अजय मोहन जैन (IIT-K, IIM-A, ex-SBI) का प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित (Paperback MRP Rs.125/-) कौतूहल से परिपूर्ण एक रोमांचकारी हिन्दी उपन्यास |

‘एक BANKER की रोमांचकारी कहानी’ एक ठेठ नौकरी-पेशा युवक सुरेश की कहानी है, जो बैंक में काम करता है| वह अनाड़ी और रूढ़िवादी है और जीवन के हर चरण में स्वयं को दुनिया की चाल से बेढब पाता है| शहर में आकर बसनेवाले परिवार की दूसरी पीढ़ी से संबंधित वह अभी भी शहरी तौर-तरीके पूरी तरह से नहीं अपना पाया है और कई चीज़ें वह अब भी अपनी समझ से बाहर पाता है| हैदराबाद, कलकत्ता और उत्तर प्रदेश के परिवेश में रचित यह उपन्यास शहरी मध्वर्गीय जीवन के द्वंद्व का एक सजीव चित्र प्रस्तुत करता है| कहानी सुरेश के जीवन और संघर्षों का यथार्थ चित्रण करती है| क्या वह इस व्यवस्था से लड़ पाएगा या उससे समझौता कर लेगा|

(1)

prisonsketchमैंने अपने जीवन में जेल तो क्या, एक पुलिस स्टेशन भी अंदर से नहीं देखा था. और यहाँ गेट के दूसरी ओर, एक टूटे, झुके हुए फिलिपॉज की बाहें थामे मैं जेल की उँची दीवारों के बीच खड़ा था. “सुरेश, प्लीज़ मेरी मदद करो. आई एम सिंकिंग.” फिलिपॉज अपना संतुलन खो रहा था. मैंने तुरंत उसे संभाला और शांत करने की कोशिश की. असहायता के उस पल में मैंने उसकी आँखों में जो भय देखा वो अब भी मेरे मन में अंकित है. मैं पानी के लिए चिल्लाया पर जेल कर्मचारियों में से किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया. उनके मन में किसी प्रकार की संवेदना या दया नहीं थी. हर चीज़ (शायद एक को छोड़कर) से निरपेक्ष वे अपने ही नियमों से चलते थे.

(2)

girlsketchसामनेवाली विंग का कॉरिडोर महिला प्रोबेशनर्स के लिए था और लगभग अनचाहे ही हमारा ध्यान उस ओर चला गया था | उस विंग की रेलिंग्स पर टाइट जींस में बैठी हुई महिलाओं का प्रष्ठ भाग बहुत मजेदार द्र्श्य उपस्थित कर रहा था | एक महिला कुछ आगे की ओर झुकी हुई पोजीशन में बैठी थी, उसकी कुरती हवा में उसकी जींस से काफ़ी उँचीं उठ गयी थी और पुरुषों को उसकी रीढ़ के निचले हिस्से का दर्शन करा रही थी | यह द्र्श्य देखकर हमारी आँखें और जीभें बाहर निकल आईं……

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