अंश
1.
जादो एक बहुत ही खूबसूरत–गोरा लंबा–तगड़ा जवान था। रुक्मणी पहली ही नजर में उस पर फिदा हो गई। जादो अभी दूसरी ही बार लोथल आ रहा था और अकेला पहली ही बार आ रहा था। इससे पहले वह बहुत कम समय के लिए अपने पिता के साथ आया था, इसलिए शायद वह कुछ सहमा सा था। उसके साथवालों ने जब रुक्मणी से कुछ पूछना चाहा तो रुक्मणी की खुशी का पारावार नहीं रहा। बातों–बातों में पता चला कि जादो हड़प्पा के एक बड़े व्यापारिक परिवार से संबंध रखता था और व्यापार के सिलसिले में लोथल आया था। आगे पता चला कि वह खासकर रुक्मणी के परिवार के साथ ही व्यापार के सिलसिले में बात करने आया था। रुक्मणी भी व्यापार में अपने परिवार का हाथ बँटाती थी।
2.
…मैं सरकारी दफ्तर में खड़ा था और समझ में नहीं आ रहा था कि मेरी यह फाइल चल क्यों नहीं रही, जबकि इसे बगल वाले बाबू के पास ही जाना है। “अरे, आप कैसे सरकारी कागज छू सकते हैं,” बाबू बोला। जब मैंने यह कहा कि इसमें क्या है, मैं रख देता हूँ।
“बाहर चपरासी रामप्रसाद बेंच पर बैठा होगा, उसे कह दीजिए,” बाबू फिर बोला।
बाहर जब मैंने रामप्रसाद से कहा तो वह बोला, “इसमें दो पहिए तो लगाइए तभी तो चलेगी।”
मैंने झिझकते हुए उसे दस का नोट दिया तो वह देखने लगा और बोला, “और नहीं हैं।” मेरे नकारात्मक में सिर हिलाने पर फिर बोला, “चलिए, पहले आपका काम कर दें।” मेरी जान–में–जान आई।